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बिरासनी धाम में खुलेआम कट रहा मांस, मुख्यमंत्री के पहले आदेश की उड़ रही धज्जियाँ

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बिरसिंहपुर पाली / मनु उपाध्याय : 

उमरिया जिले की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माता बिरासनी धाम, बिरसिंहपुर पाली इन दिनों खुलेआम कटते मांस और प्रशासनिक उदासीनता के कारण गंभीर सवालों के घेरे में है। जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु और राजगीर माता के दर्शन को आते-जाते हैं, वहीं खुले में मांस कटने का दृश्य उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा रहा है।

 

नगर पालिका परिषद पाली द्वारा मांस व्यापारियों की दुकानों को नगर स्थित अस्पताल के समीप स्थानांतरित तो कर दिया गया, लेकिन नियमों और शासन के आदेशों का पालन कराना स्थानीय प्रशासन की प्राथमिकता में नजर नहीं आ रहा।

 

 

सबसे गंभीर और चिंताजनक पहलू यह है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा पद ग्रहण करने के तुरंत बाद जारी किए गए पहले और स्पष्ट आदेश “कोई भी मांस व्यापारी खुले में मांस नहीं काटेगा और दुकान को हरे पर्दे से पूरी तरह ढककर रखेगा”का यहां खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है।

 

जमीनी हकीकत यह है कि कई दुकानों पर केवल औपचारिकता निभाते हुए हरे पर्दे टांग दिए गए हैं, लेकिन पर्दों के पीछे खुलेआम मांस काटा जा रहा है, जो सड़क से साफ दिखाई देता है। इससे न केवल आम राहगीरों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि वे श्रद्धालु भी परेशान हैं जो मांस का सेवन नहीं करते और धार्मिक आस्था से जुड़े हुए हैं।

 

स्थिति सिर्फ बिरासनी धाम क्षेत्र तक सीमित नहीं है। नगर के मुख्य मार्ग मीना गेट के नीचे भी खुलेआम मीट-मांस की दुकान का संचालन किया जा रहा है, जहां से उठती दुर्गंध के कारण राहगीरों को नाक बंद कर निकलना पड़ता है। इसी तरह नगर के अघोषित बस स्टैंड के समीप भी एक मीट दुकान संचालित की जा रही है, जहां नियमों को ताक पर रखकर न केवल खुले में मांस बेचा जा रहा है, बल्कि वहीं बैठाकर शराब पिलाए जाने की भी चर्चा है।

 

सबसे हैरानी की बात यह है कि पूरे मामले में न तो स्थानीय नगर पालिका परिषद पाली कोई ठोस कार्रवाई करती नजर आ रही है और न ही जिला प्रशासन द्वारा मुख्यमंत्री के आदेशों के पालन को लेकर कोई प्रभावी निगरानी दिखाई दे रही है। धार्मिक नगरी में खुलेआम मांस कटने की यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता का जीता-जागता उदाहरण बन चुकी है।

 

इस पूरे मामले को लेकर जब मुख्य नगर पालिका अधिकारी भूपेंद्र सिंह से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि “आपके माध्यम से मामला संज्ञान में आया है। संबंधित दुकान संचालकों से बात कर उन्हें समझाइश दी जाएगी। यदि इसके बाद भी नियमों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित दुकानदारों को नोटिस जारी करते हुए आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।”

अब देखना यह होगा कि यह बयान सिर्फ औपचारिक आश्वासन बनकर रह जाता है या फिर ज़मीनी स्तर पर वाकई कार्रवाई दिखाई देती है, क्योंकि धार्मिक नगरी की गरिमा से जुड़ा यह विषय सीधे तौर पर जनभावनाओं और मुख्यमंत्री के आदेशों से जुड़ा हुआ है।

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